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कॉमेडी किंग से तिहाड़ जेल तक: 2010 की एक गलती ने कैसे राजपाल यादव को कर्ज और जेल तक पहुंचा दिया


बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव एक बार फिर तिहाड़ जेल पहुंच गए हैं, जिससे उनके प्रशंसकों में निराशा है, छोटे से शहर से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री में कॉमेडी किंग कहलाने वाले राजपाल यादव की जिंदगी में यह मोड़ 2010 में आया जब उन्होंने खुद की फिल्म ‘अता-पता लापता’ बनाने का फैसला किया और इसके लिए दिल्ली की प्राइवेट कंपनी M/s Murli Projects Pvt Ltd से करीब 5 करोड़ रुपये का लोन लिया, लेकिन 2012 में फिल्म के बुरी तरह फ्लॉप होने के बाद वे यह कर्ज चुकाने में असफल रहे, जिसके चलते उनकी कंपनी की ओर से दिए गए कई पोस्ट-डेटेड चेक बाउंस हो गए और मामला अदालत तक पहुंच गया।

अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन ब्याज, पेनाल्टी और समय पर भुगतान न होने की वजह से 5 करोड़ का कर्ज बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये हो गया। जून 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा पर अस्थायी रोक लगाकर समझौते का समय दिया, अक्टूबर 2025 में कुछ डिमांड ड्राफ्ट भी जमा किए गए, लेकिन पूरी राशि का भुगतान नहीं हो सका, जिसके बाद 2 फरवरी 2026 को कोर्ट ने इसे आदेश की अवहेलना मानते हुए सरेंडर का निर्देश दिया और 5 फरवरी 2026 को राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया।

इस मामले में पहले ही अगस्त 2024 में Central Bank of India ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर स्थित उनके घर को सील कर दिया था, जबकि राजपाल यादव की अनुमानित नेटवर्थ 15 से 20 करोड़ रुपये बताई जाती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है; फिल्म और ब्रांड एंडोर्समेंट उनकी आय का मुख्य जरिया रहे हैं, लेकिन एक गलत फैसला, फिल्म का फ्लॉप होना और समय पर कर्ज न चुका पाना उनकी जिंदगी को कॉमेडी से अदालत और जेल तक ले आया।

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