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CG NEWS: दशरथ माँझी’ की तरह ग्रामीणों ने खुद बनाई सड़क, 76 साल बाद भी सरकारी ध्यान नदारद


मनेंद्रगढ़, चिरमिरी ,भरतपुर। CG NEWS: जैसे दशरथ मांझी ने अकेले अपने मेहनत और जज़्बे से पहाड़ काटकर गांववालों के लिए रास्ता बनाया था, वैसे ही बडेरा गांव के ग्रामीण आज 76 साल बाद भी सड़क सुविधा न मिलने के बावजूद खुद ही सड़क बनाने में जुटे हैं। बारिश में कीचड़ और गड्ढों से जूझते ये लोग, अस्पताल जाने और रोजमर्रा के जीवन के लिए अपने श्रम और हिम्मत का सहारा ले रहे हैं। सरकारी उदासीनता के बीच, बडेरा का यह संघर्ष एक जीवंत मिसाल बन चुका है कि जब चाह हो, तो हर बाधा पार की जा सकती है।

( क्या वजह है कि ग्रामीण खुद सड़क निर्माण कर रहे हैं )

लाचार होकर ग्रामीणों ने खुद ही सड़क बनाने का बीड़ा उठाया। श्रमदान के जरिए लोग पिछले 15-20 दिन से पत्थर हटाकर और गड्ढे भरकर सड़क को चलने लायक बनाने में जुटे हैं।

"हर साल यही समस्या होती है। कोई मदद नहीं करता, इसलिए हम खुद ही सड़क बना रहे हैं। अस्पताल जाने और आने-जाने में बहुत दिक्कत होती है।"

"सरपंच से कोई उम्मीद नहीं है। कभी-कभी डिलीवरी हो जाती है तो अस्पताल पहुंचने में दिक्कत आती है। इसलिए हम सेवा भावना से खुद ही सड़क बना रहे हैं।"

"यहां एंबुलेंस तक नहीं आ पाती। आए दिन एक्सीडेंट हो जाते हैं। इसलिए हम लोग खुद मिलकर धीरे-धीरे सड़क सुधार रहे हैं।"

बरसात के दिनों में यह पहाड़ी रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। पानी उतरने से सड़क कट जाती है और फिसलन इतनी बढ़ जाती है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।

नेटवर्क की समस्या, जंगली जानवरों का खतरा और सड़क की दुर्दशा—बडेरा गांव के लोग हर दिन इन मुश्किलों का सामना करते हैं।

बडेरा गांव की यह तस्वीर बताती है कि आज भी कई गांव सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। सवाल यह है कि कब तक ग्रामीण अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए खुद श्रमदान करने को मजबूर रहेंगे?

सरकार कहती है कि हम विकास कर रहे हैं लेकिन विकास किस धारा पर बह रहा है यह देखा जा सकता है कि ग्रामीण खुद ही किस तरह से अपने आने जाने के लिए परिश्रम कर रहे हैं सरकार चुनाव के वक्त तो उन दूर दराज वन्यान चलो क्षेत्राओं तक पहुंच जाते हैं लेकिन उनकी समस्या आज धरातल पर धारा का धरा रह गया लोग अपनी जेब भरने में कोई कसर नहीं छोड़ते और जनप्रतिनिधि रहते हैं कि हमारी सरकार विकास कर रही है क्या यही विकास है क्या देश को आजाद हुए आज इतने वर्ष तक की देश की यह हालत होना सही है कितनी सरकारी आई और चली गई लेकिन वन न्यांचल क्षेत्र आज भी यस करता है शहरों में रहने वाले कहते हैं विकास हो रहा है और ग्रामीण क्षेत्र आज भी अपने मूलभूत सुविधाओं से वंचित पड़ा है अब देखने वाली बात होगी कि सरकार की आंख कब खुलेगी कब इन ग्रामीणों को सुविधा मिल पाएगा

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