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देशी को प्रोत्साहन / धान, चावल, रुद्राक्ष, रंगीन मोती, स्टोन से महिलाएं बना रहीं राखियां

  • लोगों को भी सस्ते आसानी से मिल सकेगी देसी राखियां, वैश्विक महामारी के दौरान बिक्री से मिले पैसों से समूह की महिलाएं आर्थिक रूप से बन सकेंगी आत्मनिर्भर


जांजगीर. स्व सहायता समूह की महिलाओं ने रक्षाबंधन के पर्व की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उन्होंने भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूती से बांधने के लिए धान, चावल, रूद्राक्ष, रंगीन मोती, स्टोन, ऊन से राखियां बनाना शुरू कर दिया है‌। बनाई जा रही राखियां आसपास के मार्केट के दुकानदारों को उपलब्ध कराई जा रही है। महिला समूह द्वारा निर्मित ये राखियां सस्ते दामों में लोगों को मिल सकेंगी।
जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी तीर्थराज अग्रवाल ने बताया कि एनआरएलएम बिहान से महिला स्व सहायता समूहों को विभिन्न गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। अगले माह रक्षाबंधन है, इसलिए समूहों को राखियां बनाकर बेहतर स्वरोजगार प्राप्त हो इसके लिए लगातार प्रेरित भी किया जा रहा है। 
जनपद पंचायत बम्हनीडीह की ग्राम पंचायत परसापाली, पोडीशंकर की महिला स्व सहायता समूह जय देवी दाई, सिद्ध बाबा समूह की अध्यक्ष नीरा यादव, लीला देवी, शीतबाबा समूह अध्यक्ष बसंती जायसवाल, निशा जायसवाल, रानी लक्ष्मीबाई समूह बिर्रा की सदस्यों का कहना है कि रक्षाबंधन के लिए राखी बनाने से उन्हें कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान स्वरोजगार मिल रहा है। 
छत्तीसगढ़ी देसी राखियों के निर्माण में धान, चावल एवं अन्य अनाज का उपयोग किया जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से राखियां बनाकर उन्हें आसपास के मार्केट में बेचा जा रहा है, इससे समूह को अच्छी आमदनी हो रही है। रक्षाबंधन त्यौहार के पूर्व समूह की महिलाएं घरों में कोरोना वायरस को ध्यान में रखते हुए रेशम के धागेे, छोटे-बड़े मोती, चावल के दाने, अलग-अलग रंगीन कपड़े, छोटे-छोटे रूद्राक्ष, रंगीन पत्थर आदि मार्केट से खरीदकर उनसे राखियां तैयार कर रहीं हैं। ये राखियां रक्षा बंधन में भाईयों की कलाई पर सजेंगी।

देसी राखियां खरीदें ताकि देश का पैसा देश में ही रहे 
नगरदा क्लस्टर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सकरेली खुर्द के बजरंग समूह, जर्वे के सर्वमंगला समूह की अध्यक्ष हमेश्वरी श्रीवास, जेठा कलस्टर से नया सवेरा समूह की अध्यक्ष ज्योति डनसेना, जनपद पंचायत के बलोदा के अंतर्गत नवगवा स्व सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा राखी बनाई जा रही है। समूह की महिलाओं द्वारा देसी राखियां खरीदने की अपील लोगों से की जा रही है ताकि उन्हें रोजगार मिलता रहे और देश का पैसा देश में ही रहे।


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